विवाह जीवन का सबसे अहम फैसला है। यह निर्णय लेना कि विवाह करना है या नहीं, यही सबसे अधिक कठिन है। वर हो या वधु, दोनों ही विवाह के लिए अंतिम समय तक मानसिक रूप से तैयार नहीं हो पाते। लेकिन फिर चाहे परिवार की ओर से दबाव हो या फिर अपनी उम्र को देखते हुए, शादी तो करनी ही पड़ती है। वर हो या वधु, इन दोनों के ही चयन के लिए हिन्दू धर्म शास्त्रों में कई सारी बातें दर्ज है। विभिन्न धार्मिक ग्रंथों एवं उपग्रंथों में कुछ मानदण्ड बताए गए हैं, जिनको आधार बनाते हुए वर-वधु को परखा जाता है। आज हम उन्हीं बातों का सार आपके समक्ष प्रस्तुत करने जा रहे हैं, जिसकी मदद से आप एक सुंदर एवं सुशील वधु का चयन कर पाएंगे।

In mahilaon ke saath sambandh naa banaye

1.अविवाहित स्त्री

 

एक पुरुष को बिना एक स्त्री से विवाह किए, उसके साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। फिर बेशक ये आपसी सम्मझौते से हो या जबर्दस्ती, अविवाहित स्त्री के साथ संबंध बनाना पाप है। यदि कोई पुरुष ऐसा करे तो उसे उसके साथ विवाह भी करना चाहिए।

2.विधवा स्त्री

 

एक पुरुष को गलती से भी एक विधवा स्त्री के करीब नहीं जाना चाहिए, अर्थात् उसके साथ शारीरिक रूप से संपर्क ना साधें। यदि वह उससे विवाह कर ले, तो उसके बाद ही ऐसी स्त्री के साथ संबंध बनाए जा सकते हैं।

3. दुश्मन की पत्नी

 

शास्त्रों के अनुसार दुश्मन की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाना या उसके साथ किसी भी प्रकार का संपर्क तक साधना एक पाप है। ऐसी स्त्री को पूर्ण रूप से नजरअंदाज करना ही सही है। ऐसी स्त्री नुकसान का कारण भी बन सकती है।

4. शिष्य की पत्नी

 

ओहदे में खुद से नीचे की या खुद के शिष्य की पत्नी के साथ कभी शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। यह शास्त्रों में उल्लिखित महापापों में से एक महापाप माना जाता है।

5.वेश्या

 

प्राचीन समय की बात हो, या फिर आज के युग की, वेश्याओं को कभी सही नहीं समझा गया। शास्त्रों के अनुसार ऐसी स्त्री, जो धन के लिए अपना मान-सम्मान त्याग कर ‘शरीर बेचने’ को तैयार हो जाए, उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना महापाप है।

6. नशे में डूबी स्त्री

कभी भी नशे का शिकार हुई स्त्री के करीब नहीं जाना चाहिए। या जो स्त्री किसी कारण से अपने होश में ना हो, ऐसी स्त्री के साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए। उसके नशे में या बेहोश होने का फायदा उठाने वाला पुरुष महापापी कहलाता है।

7. उम्र से बड़ी स्त्री

 

खुद से उम्र में बड़ी स्त्री के साथ शारीरिक संबंध बनाना शास्त्रों की राय में गलत है। एक पुरुष को कभी भी ऐसी स्त्री को अपने प्रति आकर्षित करने का पाप नहीं करना चाहिए।

8. गर्भवती स्त्री

 

जो स्त्री एक रूह को जन्म देने वाली है, उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने वाला इंसान, मनुष्य कहलाने लायक नहीं है। स्वयं उसके पति को भी इस दौरान, अपनी पत्नी के करीब नहीं जाना चाहिए।

9.अनजान स्त्री

 

 

एक व्यक्ति को अपनी पत्नी से प्रेम करना चाहिए और उसे ही अपने करीब आने का हक़ प्रदान करना चाहिए। किसी अनजान के करीब जाना या स्वयं उसे ही ऐसा करने की अनुमति देना, शास्त्रों की दृष्टि से गलत है।

10.दोषपूर्ण स्त्री

 

इसका मतलब है जिस स्त्री ने पाप किए हों या किसी अपराध के चलते दोषी मानी गई हो, ऐसी स्त्री के साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए।

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